बेजुबां भी जानते हैं...! मोहब्बत की जुबां...!!


बेजुबां भी जानते हैं...! मोहब्बत की जुबां...!!

इस संसार में संवाद (Communication) के अनगिनत साधन हैं। इंसान ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए हज़ारों भाषाएँ और लिपियाँ बना लीं। लेकिन ब्रह्मांड की सबसे खूबसूरत और गहरी भावना—मोहब्बत—आज भी किसी भाषा की मोहताज नहीं है। जब दिल से दिल का जुड़ाव होता है, तो शब्द छोटे पड़ जाते हैं। सच तो यह है कि जिसे हम 'बेजुबां' कहते हैं, वे मोहब्बत की भाषा को हमसे कहीं बेहतर और शुद्ध रूप में समझते हैं।

शब्दों से परे एक मूक अहसास

हम अक्सर सोचते हैं कि प्यार जताने के लिए 'आई लव यू' कहना या शायरी लिखना ज़रूरी है। लेकिन कभी खिड़की पर आकर बैठने वाले कबूतरों के जोड़े को देखिए, या अपने मालिक को देखकर दुम हिलाते उस वफ़ादार कुत्ते को देखिए। उनके पास इंसानी शब्द नहीं हैं, कोई डिक्शनरी नहीं है, फिर भी उनके हर हाव-भाव में, उनकी आँखों में सिर्फ और सिर्फ निष्कपट प्रेम झलकता है।

"मोहब्बत का कोई व्याकरण नहीं होता, यह तो बस रूह से निकलती है और दूसरी रूह में समा जाती है।"

बेजुबानों का निश्छल प्रेम

इंसानी मोहब्बत में कभी-कभी शर्तें, उम्मीदें और दिखावा शामिल हो जाता है। लेकिन एक बेजुबां जीव का प्यार पूरी तरह से निश्छल और बिना किसी शर्त के होता है।

  • आँखों की भाषा: एक जानवर या परिंदा आपकी आवाज़ के उतार-चढ़ाव और आपकी आँखों की नमी को भांप लेता है। जब आप उदास होते हैं, तो वे चुपचाप आपके पास आकर बैठ जाते हैं। यह उनकी तरफ से बिना कुछ कहे ढाढस बंधाने का तरीका है।

  • स्पर्श का जादू: एक छोटा सा सहलाना या थपकी, उनके लिए दुनिया की सबसे बड़ी सौगात बन जाती है। वे शब्दों के बिना भी यह समझ जाते हैं कि यह हाथ उन्हें नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि सहलाने के लिए बढ़ा है।

प्रकृति का शाश्वत नियम

मोहब्बत दरअसल एक ऊर्जा (Energy) है, एक तरंग है। जब आप किसी के प्रति मन में करुणा और प्रेम रखते हैं, तो वह तरंग सामने वाले तक पहुँच ही जाती है, चाहे वह कोई इंसान हो, पशु-पक्षी हो या फिर प्रकृति के पेड़-पौधे। वैज्ञानिक शोध भी बताते हैं कि पेड़-पौधे भी प्रेम और सकारात्मक संगीत की मौजूदगी में ज़्यादा तेज़ी से फलते-फूलते हैं।

निष्कर्ष: दिलों को जोड़ने वाली इकलौती जुबां

अगर इस दुनिया से सारे शब्द मिटा दिए जाएं, तब भी जो चीज़ बची रहेगी, वो है मोहब्बत। यह एक ऐसी सार्वभौमिक भाषा (Universal Language) है जिसे न सुनने वाला भी सुन सकता है और न देखने वाला भी महसूस कर सकता है।

इसीलिए कहा गया है कि मोहब्बत को लफ़्ज़ों में कैद मत कीजिए। जब तक दुनिया में ये बेजुबां परिंदे और जीव मौजूद हैं, वे इंसानों को याद दिलाते रहेंगे कि जीने का असली मकसद सिर्फ और सिर्फ प्रेम बांटना है। क्योंकि सच तो यही है—"बेजुबां भी जानते हैं, मोहब्बत की जुबां!"

बेजुबां भी जानते हैं...!

मोहब्बत की जुबां...!!

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