Miss you



इबादत में रब, बातों में यार

"इबादत रब की हो, और सूरत यार की..."

प्रेम एक ऐसा एहसास है जो इंसान को खुद से ऊपर उठाकर एक नई दुनिया में ले जाता है। जब प्रेम अपनी पराकाष्ठा पर पहुंचता है, तो उसमें इबादत की पवित्रता और भक्ति की गहराई दिखाई देने लगती है। शायद यही कारण है कि सच्चे आशिकों ने हमेशा अपने महबूब में रब की झलक देखी है।

जब दिल किसी से सच्ची मोहब्बत करता है, तो उसकी हर बात, हर मुस्कान और हर याद एक दुआ बन जाती है। फिर इबादत भले रब की होती है, लेकिन आंखों के सामने यार का चेहरा होता है। यह कोई गुनाह नहीं, बल्कि प्रेम की वह अवस्था है जहां प्रेमी अपने प्रिय में ईश्वर की बनाई सबसे सुंदर रचना को महसूस करता है।

"हो सजदा रब का, और रस्म प्यार की हो..."

सजदा सिर झुकाने का नाम नहीं, बल्कि अहंकार को त्यागने का नाम है। प्रेम भी यही सिखाता है। जब इंसान प्रेम करता है, तो वह अपने स्वार्थ, अपने घमंड और अपनी सीमाओं से ऊपर उठने लगता है। प्रेम और इबादत दोनों का मूल भाव समर्पण है। एक में इंसान रब के सामने झुकता है, दूसरे में अपने प्रिय की खुशियों के लिए।

आशिकों का मजहब भी बड़ा अनोखा होता है। उसमें न कोई दीवार होती है, न कोई सीमा। वहां सिर्फ दिलों की भाषा बोली जाती है। प्रेम का धर्म इंसानियत है और उसका नियम वफ़ा।

"आशिकों के मजहब का क्या कहना..."

आशिकों की दुनिया में नफरत की कोई जगह नहीं होती। वहां हर दर्द में मिठास होती है और हर इंतजार में उम्मीद। प्रेमी जब रब का जिक्र करता है, तो उसके दिल में शुक्र होता है कि उसे मोहब्बत जैसा अनमोल एहसास मिला। और जब यार की बात करता है, तो उसकी आंखों में चमक आ जाती है।

यही तो प्रेम की खूबसूरती है—जिक्र रब का हो और बात यार की। क्योंकि दोनों ही दिल को सुकून देते हैं। एक आत्मा को रोशन करता है और दूसरा जीवन को।

सच्ची मोहब्बत इंसान को बेहतर बनाती है। वह उसे प्रेम, करुणा, धैर्य और समर्पण का पाठ पढ़ाती है। इसलिए प्रेम और इबादत को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। दोनों ही दिल को पाक बनाते हैं और इंसान को उसकी असली पहचान से मिलाते हैं।

अंत में, प्रेम का सबसे सुंदर रूप वही है जिसमें रब की बंदगी भी हो और यार की मोहब्बत भी। जहां दुआओं में रब बसता हो और धड़कनों में यार।

क्योंकि आशिकों की दुनिया में सचमुच—
जिक्र रब का होता है, और बात यार की होती है।

Miss you

इबादत रब की हो....

और सूरत यार की 

हो सजदा रब का.....

और रस्म प्यार की हो 

आशिकों के मजहब का 

क्या कहना कलकुवा 

जिक्र रब का.... 

और बात यार की हो...!!
 


@preetsinghsr

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