वो अनकही बातें: जब खामोशी ही दिल का सबसे बड़ा बोझ बन जाए

 


वो अनकही बातें: जब खामोशी ही दिल का सबसे बड़ा बोझ बन जाए

हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहाँ हर कोई अपनी बात कहना चाहता है, लेकिन सुनने वाले बेहद कम हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में जहाँ हर पल को 'शेयर' किया जाता है, वहाँ भी कुछ एहसास ऐसे होते हैं जो हमारे भीतर ही कहीं दफ़न रह जाते हैं। जब दिल में जज़्बात का समंदर उमड़ रहा हो और सामने कोई ऐसा न हो जो बिना कहे सब समझ सके, तब अंतरात्मा से एक ही आवाज़ निकलती है—"कौन समझे?"

यह सिर्फ एक सवाल नहीं है, बल्कि एक गहरी तड़प है। उन पलों की, उन यादों की और उन रिश्तों की जो कभी मुकम्मल ही नहीं हो पाए।


1. अनछुए एहसास और अनजिया जीवन

"वो अनकही बातें, वो अनछुआ एहसास वो पल, खुशियां, साथ जो हमने कभी जिया नहीं..."

ज़िंदगी में सबसे ज़्यादा दर्द उन चीज़ों का नहीं होता जो मिलकर खो गईं, बल्कि उनका होता है जो कभी हमारी हो ही नहीं सकीं। वो अधूरी खुशियाँ, वो ख़्वाब जो सिर्फ बंद आँखों तक सीमित रहे, और वो साथ जिसकी चाहत तो थी पर जो कभी हकीकत न बन सका। इंसान अक्सर उस 'अनजियें जीवन' के मलबे तले दबा रहता है, और इस कसक को किसी के सामने बयां करना नामुमकिन सा हो जाता है।

2. जब सब कुछ 'अनकहा' रह जाए

ज़िंदगी का एक कड़वा सच यह भी है कि जब बातें अनकही रह जाती हैं, तो उनके साथ जुड़े दर्द, ख्वाहिशें, और कोशिशें भी बेज़ुबान हो जाती हैं।

  • अंजाम और रिश्ते: जब इरादे और वादे शब्दों का रूप नहीं ले पाते, तो रिश्ते भी 'अनकहे' बनकर रह जाते हैं। ऐसे रिश्ते जो न तो पूरी तरह टूटते हैं और न ही कभी जुड़ पाते हैं।

  • जीत और हार का मौन: दुनिया सिर्फ शोर और कामयाबी को देखती है। लेकिन उस अंदरूनी लड़ाई का क्या, जिसे इंसान हर रोज़ खुद से लड़ता है? जहाँ जीत का कोई जश्न नहीं होता और हार का कोई गवाह नहीं होता।

3. ज़िंदगी का बेनाम सफ़र

"ना जाने कौन से मोड़ पे ले आई है ये ज़िंदगी ना रास्ता है ना मंज़िल, बस जीए जा रहे हैं..."

कभी-कभी ज़िंदगी हमें एक ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर देती है जहाँ चारों तरफ सिर्फ धुंध होती है। न पीछे मुड़ने का रास्ता होता है और न आगे कोई साफ़ मंज़िल दिखाई देती है। ऐसे में इंसान सिर्फ एक रोबोट की तरह, बिना किसी उम्मीद के, बस सांसों का सिलसिला जारी रखता है। यह स्थिति सबसे डरावनी और थका देने वाली होती है, जहाँ आप चल तो रहे हैं, पर कहाँ जा रहे हैं, इसका कोई ठिकाना नहीं।

🌿☘️🍃🥀कौन समझे 🥀🍃☘️🌿
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वो अनकही बातें,वो अनछुआ एहसास
वो पल, खुशियां,साथ _____________
जो हमने कभी जिया नहीं ___________
_______________________कौन समझे

कुछ अनकही बातें, कुछ अनकही यादें 
और फ़िर दर्द भी अनकहे___________
कुछ अनकही ख्वाहिशें, कुछ अनकही कोशिशें 
और फ़िर अंज़ाम भी अनकहे _____________
कुछ अनकहे वादें, कुछ अनकहे इरादें _______
और फ़िर रिश्ते भी अनकहे _______________
कुछ अनकही जीत, कुछ अनकही हार _______
और फ़िर एहसास भी अनकहे_____________!!
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ना जाने कौन से मोड़ पे ले आई है ये ज़िंदगी
ना रास्ता है ना मंज़िल,बस जीए जा रहे हैं
_________________________कौन समझे

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