मोहब्बत तिजारत नहीं होती
कभी-कभी जिंदगी इंसान को इस मोड़ पर ला खड़ा करती है जहाँ हर तरफ सिर्फ दर्द दिखाई देता है।
दिल टूट जाता है, उम्मीदें बिखर जाती हैं और इंसान खुद से भी दूर होने लगता है।
ऐसे समय में कई बार मन करता है कि इस दुनिया से ही मुंह मोड़ लिया जाए, हर रिश्ते, हर उम्मीद और हर एहसास से दूरी बना ली जाए।
लेकिन फिर किसी अपने का ख्याल दिल में दस्तक देता है।
एक ऐसा चेहरा, जिसकी मुस्कान हमारी वजह से जुड़ी होती है।
एक ऐसा रिश्ता, जिसे छोड़ देने का ख्याल भी दिल को अंदर तक तोड़ देता है।
तभी इंसान सोचता है —
“हम भी चाहते गर ग़म-ए-जहाँ से मुंह मोड़ लेते,
बस एक तेरा ख्याल आया…
तुम्हें इस जहान में अकेला कैसे छोड़ देते…”
यही तो असली मोहब्बत होती है।
मोहब्बत सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि किसी के लिए जीने की वजह बन जाने का एहसास है।
जब इंसान खुद टूट रहा हो, फिर भी किसी अपने को संभालने की फिक्र करे — वही सच्ची चाहत कहलाती है।
आजकल बहुत लोग मोहब्बत को एक सौदे की तरह देखने लगे हैं।
जहाँ मतलब पूरा हुआ, वहाँ रिश्ता खत्म।
जहाँ नया चेहरा मिला, वहाँ पुरानी यादें भुला दी गईं।
लेकिन सच्चा प्यार कभी तिजारत नहीं होता।
मोहब्बत में दिल बदले नहीं जाते, निभाए जाते हैं।
जो लोग हर डाल पर बैठने वाले परिंदों की तरह हर दिन रिश्ते बदलते रहते हैं,
असल में उनके अपने कोई ठिकाने नहीं होते।
“मोहब्बत ये तिजारत का खेल नहीं…
हर डाल-डाल बदलने वाले परिंदे के,
अपने खुद के मकान नहीं होते…”
रिश्तों की असली खूबसूरती वफादारी में होती है।
किसी एक इंसान का होकर रह जाना आसान नहीं होता,
लेकिन जो लोग सच्चे दिल से मोहब्बत करते हैं,
वो हालात बदलने पर भी अपने जज़्बात नहीं बदलते।
क्योंकि उनके लिए प्यार सिर्फ एक एहसास नहीं,
बल्कि पूरी जिंदगी की जिम्मेदारी होता है।

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