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मेरी खामोशी

जब रति ने प्रेम की उँगली थामकर हमारे कमरे में प्रवेश किया उस रात कमरे में कोई विशेष रोशनी नहीं थी…

“दिल करता है कोई गले लगा ले और मैं रो लू ज़ोर से, मैं थक सा रहा हूँ अपने अंदर के शोर से..!”

“दिल करता है कोई गले लगा ले और मैं रो लू ज़ोर से, मैं थक सा रहा हूँ अपने अंदर के शोर से..!” कभी-कभी…

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That is All