मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो, बात जो दिल में है, वह कहने दो।

 

“मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो” 


मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो,

बात जो दिल में है, वह कहने दो।

मैं जानती हूँ, सब कुछ हो तुम मेरे,

यह भी तो मुझे मन से कहने दो।

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


चाँद-सितारे, सूरज मेरे तुम ही हो,

मेरी हर सुबह, मेरी हर शाम तुम ही हो।

मैं प्यासी नदी, तुम उसका पानी हो,

मेरी धड़कनों की मीठी कहानी हो।

सूख जाऊँगी जो नहीं बही मन से,

रोको न अब, मुझे मन से बहने दो,

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


हर पल तुम्हारे साथ ही तो चलती हूँ,

तुम्हारी खुशियों में ही खुशियाँ ढूँढ़ती हूँ।

कभी तुम्हारी राहों के काँटे चुनती हूँ,

कभी तुम्हारे सपनों के दीप जलाती हूँ।

पर मेरे भीतर भी कुछ सपने पलते हैं,

उन्हें भी कभी आँखों में सजने दो,

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


तुम रास्ता, मैं पतली सी पगडंडी हूँ,

तुम गर्मी, मैं बर्फीली सर्दी सी हूँ।

तुम्हारे कदमों की आहट से महकती हूँ,

तुम्हारे स्पर्श से फिर से चहकती हूँ।

एक जगह जमकर पत्थर बन जाऊँ न,

रखो सिर सीने पर, थोड़ी सरगर्मी दो,

मेरी खामोशी को भी आवाज़ बनने दो,

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


मैंने भी तो अपने हिस्से के दिन देखे हैं,

कुछ हँसते हुए, कुछ चुपचाप सहे हैं।

कुछ ख्वाब पलकों पर रखकर सोई हूँ,

कुछ अपनों के लिए हँसकर रोई हूँ।

हर बार तुम्हारी खुशी को आगे रखा,

हर बार अपने मन को पीछे रखा।

आज अपने मन की भी सुन लेने दो,

जो दबा है बरसों से, उसे कहने दो,

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


भावनाओं का ज्वार उमड़ता मन में,

और अश्क की लड़ियाँ हैं अखियों में।

कुम्हला कर मैं सूख न जाऊँ फूलों सी,

मुझे तुम कलियों के जैसे खिलने दो।

हर पंखुड़ी को अपनी खुशबू पाने दो,

हर रंग को अपना रूप दिखाने दो,

मेरे मन के आकाश में भी

थोड़े बादल, थोड़ी धूप रहने दो,

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


हर रिश्ता मेरी पहचान नहीं है,

हर भूमिका मेरा पूरा जहान नहीं है।

मैं माँ हूँ, पत्नी हूँ, बेटी भी हूँ,

पर इन सबसे पहले एक स्त्री भी हूँ।

मेरी भी कुछ चाहतें हैं, कुछ अरमान हैं,

मेरे भीतर भी छोटे-छोटे आसमान हैं।

उन आसमानों में मुझे उड़ने दो,

मेरे पंखों को थोड़ा खुलने दो,

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


कभी यूँ ही बिना वजह मुस्कराने दो,

कभी खुद से खुद की बातें करने दो।

कभी आईने में खुद को निहार लेने दो,

कभी अपने लिए भी सँवर जाने दो।

हर बार किसी की पसंद बनने से पहले,

एक बार मुझे अपनी पसंद बनने दो।

मेरी हँसी को मेरा रहने दो,

मेरी खामोशी को भी मेरा रहने दो,

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


मैं कोई शिकायत लेकर नहीं बैठी,

न ही किसी से कोई हिसाब माँगती हूँ।

बस इतना सा अधिकार चाहती हूँ,

कि कभी अपने मन की भी मानती हूँ।

तुम्हारा होना मेरे लिए बहुत है,

तुम्हारा साथ मेरे लिए बहुत है,

पर मेरे होने का अर्थ भी रहने दो,

मेरे अस्तित्व को मुझमें रहने दो।

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


जब थक जाऊँ जीवन की दौड़ में,

तो कुछ पल मुझे ठहर जाने दो।

हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं,

कभी मेरी आँखों को भी कह जाने दो।

जो आँसू हैं, उन्हें बह जाने दो,

जो दर्द है, उसे ढल जाने दो,

मन के कोने में जो जमा है वर्षों से,

उसे बारिश बनकर बरस जाने दो।

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


मेरी चुप्पी को कमजोरी मत समझना,

मेरी हँसी को मजबूरी मत समझना।

मैं टूटकर भी संभलना जानती हूँ,

गिरकर फिर से चलना जानती हूँ।

बस हर बार मजबूत बनने की

मुझसे उम्मीद मत करना,

कभी मुझे भी किसी के कंधे पर

बच्चे की तरह रो लेने दो।

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


मैं तुम्हारी हूँ, इसमें कोई संशय नहीं,

तुम मेरे हो, इससे सुंदर और कुछ नहीं।

पर प्रेम का अर्थ मिट जाना तो नहीं,

प्रेम का अर्थ खुद को भुलाना तो नहीं।

दो दिल साथ चलें तो राह सुहानी है,

पर दोनों की अपनी भी तो कहानी है।

तुम अपना आसमान मेरे साथ रखो,

मैं अपनी धरती भी साथ रखने दो।

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


कल जब उम्र की शाम उतर आएगी,

जब आँखों की चमक थोड़ी थक जाएगी,

जब बालों में चाँदी उतर आएगी,

तब भी एक लड़की मेरे भीतर मुस्कराएगी।

उसे मत कहना अब चुप हो जाओ,

उसे मत कहना अब सपने छोड़ जाओ।

उसकी आँखों में बचपन रहने दो,

उसके होंठों पर थोड़ी शरारत रहने दो,

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


मैं नदी हूँ, मुझे बहने दो,

मैं हवा हूँ, मुझे चलने दो।

मैं दीप हूँ, मुझे जलने दो,

मैं गीत हूँ, मुझे मचलने दो।

मैं मिट्टी हूँ, मुझे महकने दो,

मैं फूल हूँ, मुझे खिलने दो।

मैं जो हूँ, मुझे वही रहने दो,

मेरी पहचान मुझे ही रहने दो।

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


न मैं तुमसे दूर होना चाहती हूँ,

न तुम्हारा हाथ छोड़ना चाहती हूँ।

बस तुम्हारे साथ चलते-चलते

कभी खुद तक भी लौटना चाहती हूँ।

तुम मेरी मंज़िल हो सकते हो,

पर मेरी पूरी दुनिया भी मैं हूँ।

मेरे हिस्से का थोड़ा सा सूरज,

मेरे हिस्से की थोड़ी सी धूप रहने दो।

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।


बात जो दिल में है, वह कहने दो,

आँख में जो है, उसे बहने दो।

जो सपना है, उसे पलने दो,

जो रिश्ता है, उसे खिलने दो।

तुम मेरे हो, यह सच रहने दो,

पर मैं भी अपनी हूँ, यह कहने दो।

मेरी साँसों में मेरा भी नाम रहने दो,

मेरे मन में मेरा थोड़ा सा मुकाम रहने दो।

बस इतनी सी मेरी विनती है,

इसे मेरी कोई जिद मत समझना।

मैं तुमसे कुछ छीन नहीं रही,

बस खुद को थोड़ा पा रही हूँ।

तुम्हारे प्रेम में रहकर भी

अपने अस्तित्व को बचा रही हूँ।

मेरी इस छोटी सी चाहत को

मेरी कोई खता मत समझना—

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो।

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो,


बात जो दिल में है, वह कहने दो।

मैं जानती हूँ, सब कुछ हो तुम मेरे,

यह भी तो मुझे मन से कहने दो।

मैं तुम्हारी होकर भी

थोड़ी सी अपनी रहूँ,

मेरे हिस्से की दुनिया में

मुझे थोड़ा सा जीने दो।

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो…

मुझे मुझमें थोड़ा सा तो रहने दो…




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